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Saturday, 28 March 2015

Remove Problems with Sankatmochan Hanuman Ashtak | संकटमोचन हनुमान अष्टक के पाठ से समस्याओं से मुक्ति पाए

कृपया डोनेट करे - आपके योगदान किए हुए १०० रूपय में से ५०% रकम अनाथ बचो को तथा बाकि बचे ५०% माँ के चरणों में अर्पित किया जायेगा | आपका योगदान अति अमूल्य है | डोनेट करने के लिए निचे दिए गए बटन पर क्लीक करे |


                          

भगवान महाबली हनुमान, भगवान शिव के ११ वे रूद्र अवतार है, वे पवनपुत्र है | वे भगवान राम के परम भक्त है, जिन्होंने सात समुंदर पार कर भगवान राम की मदत की थी सीता मैया को ढूंड ने में | महाबली का रूप अत्यंत ही निराला है और सबसे अद्भुत भी है | भुत, प्रेत, पिसाच सब भगवान हनुमान से डरते है, और जो हनुमान जी की पूजा करते है उनकी सदैव रक्षा होती है |

संकटमोचन हनुमानाष्टक एक अद्भुत मन्त्र है, यह भगवान हनुमान की महिमा में पाठ किया जाता है | भगवान हनुमान को स्वास्थ्य और समृद्धि का देवता माना जाता है | जो भी हनुमान अष्टक का पाठ करता है वो उन्हें प्रिय हो जाता है, सिर्फ पाठ करने वाले को ही नहीं बल्कि पुरे परिवार के लिए ये लाभप्रद सिद्ध होता है | हनुमान अष्टक के नित्य पाठ से परिवार में शांति बनी रहती है, और परिवार के लोगो का स्वस्थ सुधर जाता है |

जीवन में आने वाले विभिन्न समस्या अपने आप ही दूर हो जाते है और इन्सान को सुख शांति प्राप्त हो लगती है | दिनचर्या में आनेवाली बाधाए और विघ्न दूर होते है और शारीरिक पीडाए भी कम हो जाती है | भगवान हनुमान अपने भक्तो की सदैव रक्षा करते है, उन्हें हर संकट से दूर रखते है |

हनुमान चालीसा, हनुमान अष्टक, बजरंग बाण इत्यादि को अगर “सिद्ध हनुमत पूजन यन्त्र” के सामने धुप, दीप इत्यादि जलाकर जपा जाए तो प्रभाव बहुत ही ज्यादा शक्तिशाली होता है, अतः आप स्वयं इसका नित्य पाठ करे और प्रभाव देख ले |

संकटमोचन हनुमानाष्टक

बाल समय रबी भक्षी लिए तब
तीनहु लोक भयो अंधियारो |
ताहि सों त्रास भयो जग को
यह संकट काहु सों जात ना टारो ||
देवन आनि करी बिनती तब
छाडी दियो रबी कष्ट निवारो |
को नहीं जानत है जग में
कपी संकटमोचन नाम तिहारो ||१||

बाली की त्रास कपीस बसै गिरी
जात महाप्रभु पंथ निहारो |
चौंकी महामुनि शाप दियो तब
चाहिए कौन बिचार बिचारो ||
कै द्विज रूप लिवाय महाप्रभु
सो तुम दास के सोक निवारो |
को नहीं जानत है जग में
कपी संकटमोचन नाम तिहारो ||२||

अंगद के संग लेन गए सिय
खोज कपीस यह बैन उचारो |
जीवत ना बचीहौ हम सु जु
बिना सुधि लाए इहाँ पगु धारो ||
हेरी थके तट सिन्दू सबै तब लाय
सिया-सुधि प्राण उबारो |
को नहीं जानत है जग में
कपी संकटमोचन नाम तिहारो ||३||

रावन त्रास दई सिय को सब
राक्षसी सों कहि सोक निवारो |
ताहि समय हनुमान महाप्रभु
जाय महा रजनीचर मारो ||
चाहत सिय असोक सों आगे सु
दै प्रभु मुद्रिका सोक निवारो |
को नहीं जानत है जग में
कपी संकटमोचन नाम तिहारो ||४||

बाण लाग्यो उर लछिमन के तब
प्राण ताजे सूत रावण मारो |
लै गृह बैध सुषेन समेत
तबै गिरी द्रोण सु बीर उपारो ||
आनि सजीवन हाथ दई तब
लछिमन के तुम प्राण उबारो |
को नहीं जानत है जग में
कपी संकटमोचन नाम तिहारो ||५||

रावन जुद्ध अजान कियो तब
नाग की फाँस सबै सिर डारो |
श्रीरघुनाथ समेत सबै दल
मोह भयो यह संकट भारो |
आनि खगेस तबै हनुमान जु
बंधन काटी सुत्रास निवारो |
को नहीं जानत है जग में
कपी संकटमोचन नाम तिहारो ||६||

बंधू समेत जबै अहिरावन
लै रघुनाथ पटल सिधारो |
देबिहिं पूजी भली बिधि सों बलि
देउ सबै मिली मन्त्र बिचारो ||
जाय सहाय भयो तब ही
अहिरावन सैन्य समेत सँहारो |
को नहीं जानत है जग में
कपी संकटमोचन नाम तिहारो ||७||

काज किये बड देवन के तुम
बीर महाप्रभु देखि बिचारो |
कौन सो संकट मोर गरीब को
जो तुमसों नहीं जात है टारो ||
बेगी हरो हनुमान महाप्रभु
जो कछु संकट होय हमारो
को नहीं जानत है जग में
कपी संकटमोचन नाम तिहारो ||८||

दोहा –
लाल देह लाली लसे, अरु धरी लाल लंगूर |
बज्र देह दानव दलन, जय जय जय कपि सुर ||

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Sunday, 15 March 2015

Shiv Panchakshari Stotram | शिव पंचाक्षरी स्तोत्रं

कृपया डोनेट करे - आपके योगदान किए हुए १०० रूपय में से ५०% रकम अनाथ बचो को तथा बाकि बचे ५०% माँ के चरणों में अर्पित किया जायेगा | आपका योगदान अति अमूल्य है | डोनेट करने के लिए निचे दिए गए बटन पर क्लीक करे |

 
शिव पंचाक्षरी स्तोत्र  भगवान शिव को अर्पण किया गया है | भगवान शिव देवो के देव कहलाते है  इसलिए उन्हें महादेव  कहा जाता है | वे भोलेनाथ  के नाम से भी प्रसिद्ध है क्यूकी वो बहुत शांतचित् स्वाभाव के है |

शिवजी का मन्त्र पंचाक्षरी मन्त्र  के नाम से प्रसिद्ध है जो “ॐ नमः शिवाय” है | ये मन्त्र पंचाक्षरी इसलिए कहा जाता है क्यूकी ये ५ शब्दों से बना हुआ है जो शि वा है | पंचाक्षरी स्तोत्र को अगर रोजाना पढ़ा जाए तो यह अत्यधिक प्रभावशाली बन जाता है और साधक को परेशानियों से मुक्ति दिला कर जिंदगी आसान बना देता है |

भगवान शिव त्रिदेव  जो ब्रम्हा विष्णु महेश है उनमे से सबसे महत्वपूर्ण और श्रेष्ठ माने जाते है, यह स्तोत्र और पंचाक्षरी मन्त्र भगवान शिव को बहुत जल्दी प्रसन्न कर देता है | इस स्तोत्र की शक्ति अत्यधिक बढ़ जाती है अगर इसे विधि पूर्वक "शिव यन्त्र" या “महामृत्युंजय यन्त्र” के सामने जपा जाए और इसके साथ ही पंचाक्षरी मन्त्र “ॐ नमः शिवाय” की जपी जाये |


शिव पंचाक्षरी स्तोत्र

नागेन्द्र-हाराय त्रिलोचनाय
भस्मांग-रागाय महेश्वराय |
नित्याय शुद्धाय दिगम्बराय
तस्मै “न” काराय नमः शिवाय ||१||

मंदाकिनी सलिल चंदन चर्चिताय
नन्दी-श्वर प्रमथ-नाथ महेश्वराय |
मंदार मुख्य बहु-पुष्प सु-पूजिताय
तस्मै “म” काराय नमः शिवाय ||२||

शिवाय-गौरी वद-नाब्ज बृंद
सूर्याय दक्षा-ध्वर नाश-काय |
श्री नील-कंठाय वृषभ-ध्वजाय
तस्मै “शि” काराय नमः शिवाय ||३||

वशिष्ठ कुम्भो-भ्द्व गौतमार्य
मुनींद्र देवा-र्चित शेखराय |
चंद्रार्क वैश्वानर लोचनाय
तस्मै “व” काराय नमः शिवाय ||४||

यज्ञ स्वरूपाय जटा-धराय
पिनक हस्ताय सना-तनाय |
दिव्याय देवाय दिगंबराय
तस्मै “य” काराय नमः शिवाय ||५||
 

पंचाक्षर-मिदं पुण्यम यः
पठे-च्छिव सन्नी-धौ |
शिव-लोक-मवा-प्रोंती
शिवेन सह मोदते ||


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Shiv Panchakshar Stotram is dedicated to Lord Shiva, The God of All God, in hindi Devo ke Dev Mahadev. Lord Shiva is also known as Bholenath and has a very pleasing personality.

The Panchakshar Mantra "OM NAMAH SHIVAAY" is made from "Na Ma Shi Vaa Ya" five letter that pleases Lord Shiva very easily and Panchakshar Stotra is an extension to this stotram. Shiv Panchakshar Stotram if Chanted on Daily Basis will give very powerful results and make life easier and reduce stress.

This Stotram is in praise to Lord Shiva who is superior in Trinity of Lord Bramha, Lord Vishnu, Lord Mahesha. Power of this Stotram is increased when "Lord Shiva Yantra" or "Mahamrityunjay Yantra" is placed while reciting and also a mala of "OM NAMAH SHIVAAY" is chanted along with it.


SHIV PANCHAKSHAR STOTRAM

Nagendra-Haaraya Trilocha-Naaya
Bhasmang-Raagaya Maheshwaaraya |
Nityaay Shuddhaaya Digambaraaya
Tasmay "Na" Kaaraya Namah Shivaay ||1||
 

Mandakini Salil Chandan Charchitaaya
Nandishwar Pramath-Naath Maheshwaaraya |
Mandar Mukhya Bahu-Pushpa Su-Pujitaaya
Tasmay "Ma" Kaaraya Namah Shivaay ||2||

Shivaay-Gauri Vad-Nabj Brund
Suryaay Daksha-Dhwar Naash-Kaay |
Shri Neel-Kanthaay Vrushabh-Dhwajaay
Tasmay "Shi" Kaaraya Namah Shivaay ||3||

Vashisht Kumbhobh-Dhwa Gautamarya
Munindra Devarchit Shekharaay |
Chandrark Vaishwaanar Lochanaay
Tasmay "Va" Kaaraya Namah Shivaay ||4||

Yadnya Swarupaay Jataa-Dharaay
Pinak Hastaay Sana-Tanaay |
Divyaay Devaay Digambaraay
Tasmay "Ya" Kaaraya Namah Shivaay ||5||

Panchakshar Midam Punyam Yah
Pathe-Chhiv Sanni-dhou |
Shiv-Lok-Mava-Pronti
Shiven Sah Modate ||

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Wednesday, 11 March 2015

Siddha Kunjika Stotram | सिद्ध कुञ्जिका स्तोत्रं

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कुंजिका स्तोत्र  एक अत्यधिक प्रभावशाली स्तोत्र है जो माँ दुर्गा का है| माँ दुर्गा को जगद माता का दर्जा दिया गया है | माँ दुर्गा को आदिशक्ति भी कहा जाता है | इस स्तोत्र को सिद्ध कुंजिका स्तोत्र कहा गया है जिसमे बहुत ही प्रभावशाली शब्द है जो इंसान की हर एक परेशानी दूर करने में शकक्षं है, आपके जीवन में आनेवाली बाधाए और विघ्नों को नाश करके आपके जीवन को सुखमय बना सकता है ये स्तोत्र | इस स्तोत्र का नित्य जप बहुत ही फलदायी है यह आपको जीवन में प्रगती करने में बहुत मदत करेगा | इस स्तोत्र को जागृत या सिद्ध स्तोत्र कहा गया है जिसका मतलब है की ये स्वयंसिद्ध है, आपको इसे सिद्ध करने की आवश्यकता नहीं है | माँ दुर्गा की एक पुस्तिका है जिसे दुर्गा सप्तशती या चंडीपाठ कहते है, जो भी माँ दुर्गा के सप्तशती का पाठ नवरात्रि में ९ दिन करता है, वह माँ दुर्गा को प्यारा बन जाता है, माँ उसपे बहुत ही प्रसन्ना रहती है और उसे इच्छित वर प्रदान करती है और उसकी सर्व मनोकामना की पूर्ति करती है | लेकिन जो लोग यह पाठ नहीं कर पाते वह लोग इस सिद्ध कुंजिका स्तोत्र का पाठ कर आपना जीवन धन्य बना सकते है | इस स्तोत्र को नवरात्री में ९ दिन तक रोज ९ बार पाठ करने से माँ दुर्गा का आशीर्वाद निश्चित मिलता ही है |

हर इंसान को इस स्तोत्र को अपने दैनिक पूजन में सम्मिलित कर लेना चाहिए | ब्रम्हमहुर्त  जो की ४ बजे होता है और रात ११ बजे या सोने से पहले इसका जाप अत्यधिक फलदायी होता है | इस मंत्र का प्रभाव और भी बढ़ जाता है अगर आप सिद्ध दुर्गा यंत्र के सामने इसका जाप करे |

कुंजिका का मतलब है "बहुत ही रहस्यमयी और गुप्त" | इस स्तोत्र को दुर्गा सप्तशती का मूल मंत्र बताया गया है और इसमें कई प्रभावशाली बीज मंत्र भी सम्मिलित किये गए है | सबसे शक्तिशाली माँ दुर्गा का मंत्र है "ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डाये विच्चे " |

आप नीचे दिये गये स्तोत्र के पाठ के साथ रोजाना माँ दुर्गा के बीज मंत्र का जाप कर सकते है | 


सिद्ध कुञ्जिका स्तोत्र

 शिव  उवाच

शृणु देवी प्रवक्ष्यामी कुंजिका-स्तोत्र-मुत्तमम् |
येन मंत्र-प्रभावेण चंडी-जापः शुभो भवेत् ||१||

न कवचम नार्गला-स्तोत्रं किल-कम न रहस्य-कम् |
न सूक्तम नापि ध्यानम च न न्यासो न च वर्चानम् ||२||

कुञ्जिका-पाठ-मात्रेण दुर्गा-पाठ-फलं लभेत् |
अति गृह्यतरं देवी देवा-नामपि दुर्लभम् ||३||

गोप-नियम प्रयत्नेन स्वयो-निरिव पार्वती |
मारनम मोहनम वश्यम स्तम्भनो-च्चा-टना-दिकम् |
पाठ-मात्रेण संसिद्ध्येत् कुञ्जिका-स्तोत्र-मुत्तमम् ||४||

अथ मन्त्र
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुंडायै विच्चे | ॐ ग्लौं हुं क्लीं जुं सः
ज्वालय ज्वालय ज्वल ज्वल प्रज्वल प्रज्वल
ऐं ह्रीं क्लीं चामुंडायै विच्चे ज्वल हं सं लं क्षं फट स्वाहा

|| इति मन्त्रः ||
नमस्ते रुद्र-रुपिन्यै  नमस्ते मधु-मर्दिनी |
नमः कैट-भहा-रीन्यै नमस्ते महिषा-र्दिनी ||१||
नमस्ते शुंभहंत्र्यै च निशुंभा-सूर-घातिनी ||२||
जाग्रतं हि महादेवी जपं सिद्धिं कुरुष्व मे |
ऐंकारी सृष्टी-रूपायै ह्रींकारी प्रती-पालिका ||३||
क्लीन्कारी  काम-रुपिन्यै बीज-रूपे नमोस्तुते |
चामुण्डा चंड-घाती च यैकारी वर-दायिनी ||४||
विच्चे चाभ-यदा नित्यं नमस्ते मन्त्र-रूपिनी ||५||
धां धीं धुं धुर्जटे: पत्नी वां विं वुं वाग-धीश्वरी |
क्रां क्रीं क्रूं कालिका देवी शां शिं शूं मी शुभम कुरु ||६|
हुं हुं हुंकार-रुपिन्यै जं जं जं जंभ-नादिनी |
भ्रां भ्रीं भ्रूं भैरवी भद्रे भावान्यै ते नमो नमः ||७||
अं कं चं टं तं पं यं शं विं दूम ऐं विं हं क्षं
धीजाग्रम धीजाग्रम त्रोटय त्रोटय दीप्तम कुरु कुरु स्वाहा ||
पां पीं पूं पार्वती पूर्णा खां खीं खुं खेचरी तथा ||८||
सां सीं सूं सप्तशती देव्या मन्त्र-सिद्धिं कुरुष्व मे ||

|| फलश्रुती ||
इदं तू कुन्जीका-स्तोत्रम मन्त्र-जागर्ति-हेतवे |
अभक्ते नैव दातव्यम गोपितम रक्ष पार्वती ||
यस्तु कुन्जीकया देवी हिनाम सप्तशती पठेत |
न तस्य जायते सिद्धिर-राण्यै रोदानं यथा ||


। इतिश्रीरुद्रयामले गौरीतंत्रे शिवपार्वती
संवादे कुंजिकास्तोत्रं संपूर्णम्‌ ।


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Kunjika Stotram is dedicated to Goddess Maa Durga. She is known as the Mother of Whole World (MAA) and also known as Maa Adishakti. This Stotra known as Siddha Kunjika Stotram has very Powerful Words that will help People in Troubles, Vanquish all the Obstacles and help in living Peaceful Life, you will get Success in every endevour of your life. Besides this it is known as Jagrut Stotra or Siddha Stotra which means that it is fully energised Stotra. There is a Book known as Durga Saptashati or Chandi Paath which is being read during 9 Days of Navaratri, It is very vast and those who read Durga Saptashati during these 9 Days of Navaratri gets the Divine Blessing of Maa Durga and becomes very dear to Maa Durga, those who are unable to read those vast chapters of Durga Saptashati can read this small Kunjika Stotram and get all the benefits of reading Durga Saptashati. One who recites this stotra for 9 times daily during 9 days of Navratri receives blessings of Maa Durga.

One must include this prayer daily in their Pujan, One must read it during Bramhamahurta i.e. 4 am and Night after 11 am or before sleeping, which provides very powerful effect. The intensity of this mantra increases even more if you use an energised Durga Yantra.

Kunjika means "SOMETHING VERY RARE AND POWERFUL AND HIDDEN". This stotra is known as Mool Mantra of Durga Saptashati and it includes very powerful beej mantras in it. The Most powerful Beej mantra of Maa Durga is "OM AING HREEM KLEEM CHAMUNDAAYEI VICCHE".

You can read the Kunjika Stotram given Below and in addition to it chant one mala of the Beej Mantra of Maa Durga daily will help you even more.

SIDDHA KUNJIKA STOTRAM

SHIVA UVAACHA

SHRUNU DEVI PRAVAK-SHYAMI KUNJIKA-STOTRA-MUTTAMAM |
YEN MANTRA-PRABHAAVEN CHANDI-JAPAH SHUBHO BHAVET ||1||
NA KAVACHAM NARGALA-STOTRAM KILAKAM NA RAHASYAKAM |
NA SUKTAM NAAPI DHYAANAM CHA NA NYAASO NA CHA VAARCHANAM||2||

KUNJIKA-PAATH MAT-RE-NA DURGA-PAATH-FALAM LABHET |
ATI GRU-HYAN-TARAM DEVI DEVA-NAA-MAPI DURLABHAM ||3||

GOPANIYAM PRAYA-TNEN SWAYO-NIRIV PAARVATI |
MAARANAM MOHANAM VASHYAM STAM-BHANO-CHAATANAA-DIKAM |
PAATH-MATREN SAN-SIDDHAYET KUNJIKA-STOTRA-MUTTAMAM ||4||

ATHA MANTRA
OM AING HREEM KLEEM CHAMUNDAAYEI VICCHE | OM GLOUM HUM KLEEM JUM SAH
JWAALAY JWAALAY JWAL JWAL PRAJWAL PRAJWAL
AING HREEM KLEEM CHAMUNDAYE VICCHE JWAL HAM (हं) SAM (सं) LAM (लं) KSHAM (क्षं) PHAT SWAAHA
|| ITI MANTRAH ||
NAMASTE RUDRA-RUPINYEI NAMASTE MADHU-MAR-DINI |
NAMAH KAIT-BHAHA-RINYEI NAMASTE MAHI-SHAAR-DINI ||1||
NAMASTE SHUMBHA-HANTRA-YEI CHA NI-SHUMBHA-SUR-GHAA-TINI ||2||
JAAGRATAM HI MAHADEVI JAPAM SIDDHIM KURUSHVA ME |
AIN-KARI SHRUSHTI-RUPAAYEI HREEN-KARI PRATI-PAALIKA ||3||
KLEEN-KARI KAAM-RUPINYEI BEEJ RUPE NAMO-STU TE |
CHAMUNDAA CHAND-GHAATI CHA YAI-KAARI VAR-DAAYINI ||4||
VICCHE CHAABH-YADA NITYAM NAMASTE MANTRA-RUPINI ||5||
DHAAM (धां) DHEEM (धीं) DHOOM (धुं) DHUR-JATEH PATNI VAAM (वां) VEEM (विं) VOOM (वुं) VAAG-DHISH-VARI |
KRAAM (क्रां) KREEM (क्रीं) KROOM (क्रूं) KAALIKA DEVI SHAAM (शां) SHEEM (शिं) SHOOM (शूं) ME SHUBHAM KURU ||6||
HUM (हुं) HUM (हुं) HUMKAAR-RUPINYEI (हुंकार-रूपिन्ये) JAM (जं) JAM (जं) JAM JAMBHA-NAADINI |
BHRAAM (भ्रां) BHREEM (भ्रीं) BHROOM(भ्रूं) BHAIRAVI BHADRE BHAVAAN-YEI TE NAMO NAMAH ||7||
AM (अं) KAM (कं) CHAM (चं) TAM (टं) TAM (तं) PAM (पं) YAM (यं) SHAM (शं) VEEM (विं) DUM (दूम) AING (ऐं) VEEM (विं) HAM (हं) KSHAM (क्षं) 
DHEE-JAAGRAM DHEE-JAAGRAM TROTAY TROTAY DEEP-TAM KURU KURU SWAHA ||
PAAM (पां) PEEM (पीं) POOM (पुं) PAARVATI PURNA KHAM (खां) KHEEM (खीं) KHOOM (खुं) KHECHARI TATHAA ||8||
SAAM (सां) SEEM (सिं) SOOM (सूं) SAPTASHATI DEVYA MANTRA-SIDDHIM KURUSHVA ME ||

|| PHAL SHRUTI ||
IDAM TU KUNJIKA-STOTRAM MANTRA-JAAGARTI-HETAVE |
ABHAKTE NAIVA DAATA-VYAM GOPITAM RAKSH PAARVATI ||
YASTU KUNJI-KAYAA DEVI HEENAM SAPTASHATI PATHET |
NA TASYA JAAYATE SIDDHIR-RANYEI RODANAM YATHAA ||

| ITI-SHREE-RUDRAYAA-MALE GAURI-TANTRE SHIV-PARVATI
SAVADE KUNJIKASTOTRAM SAMPURNAM |

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Wednesday, 4 March 2015

Surya Ashthakam | सूर्य अष्ठकम्

कृपया डोनेट करे - आपके योगदान किए हुए १०० रूपय में से ५०% रकम अनाथ बचो को तथा बाकि बचे ५०% माँ के चरणों में अर्पित किया जायेगा | आपका योगदान अति अमूल्य है | डोनेट करने के लिए निचे दिए गए बटन पर क्लीक करे |


भगवान सूर्य ही एक ऐसे देवता है जिन्हें हम आज भी अपनी आखो से देख सकते है | वो हमें UV किरने पहुचाते है जो हर इन्सान के जीने के लिए जरुरी है | लोग सिर्फ सूर्य को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखते आये है जैसे सूर्य की रोशनी, उसकी गर्मी, सूर्य के विकिरण लेकिन प्राचीन वेदों और पुरानो के अनुसार सूर्य का तांत्रिक दृष्टिकोण भी है | इस तंत्र को सूर्य विज्ञान कहा जाता है | सूर्य विज्ञान से कोई भी इन्सान अपनी जरुरत के अनुसार मनोवांछित परिणाम हासिल कर सकता है | भगवान सूर्य की साधना कर के कोई भी इन्सान अपने जीवन में बहुत तरक्की कर सकता है, वो अपना लक्ष्य प्राप्त कर सकता है, अपने जीवन में सब कुछ हासिल कर सकता है |

भगवान सूर्य को नवग्रहों का राजा माना जाता है, वे शनिदेव और यमराज के पिता है, तो उनकी नित्य पूजा करके आप नवग्रहों का दोष और हानिकारक प्रभाव कम कर सकते है | हमें रोज भगवान सूर्य के १२ नाम लेते हुए उन्हें जल अर्पण करना चाहिए, ऐसा करने से वे प्रसन्ना हो जाते है | मै भगवान सूर्य से संबंधित और कई प्रयोग जल ही ब्लॉग पर अपलोड कर दूँगा |

सूर्य अष्ठकम् भगवान सूर्य को अर्पण किया गया स्तोत्र है | ये एक बहुत ही लाभकारी अष्टक है अगर इसे नित्य सुबह जपा जाए तो ये विभिन्न फायदे प्रदान करता है | इसे अपनी दैनिक पूजन क्रम में शामिल कर के लाभ उठाये |

अगर आप नौकरी पाने की समस्या से पीड़ित है या किसी और समस्या से पीड़ित है, तो सूर्य अष्ठकम् ही आपकी चमकने में मदत कर सकता है | “सिद्ध सूर्य यन्त्र” का इस्तेमाल करके आप इस अष्टक का प्रभाव और भी बढ़ा सकते है |

सूर्य अष्ठकम्

आदिदेव नमस्तु-भ्यम, प्रसिद् मम भास्कर,
दिवाकर नमस्तु-भ्यम, प्रभाकर नमो-स्तुते ||१||

सप्ताश्व रथ-मारू-ढम्, प्रचंडम् कश्य-पात्मजम,
श्वेत पद्मा-धरम देवं, तं सूर्य प्रण-माम्यहम ||२||

लोहितम रथ-मारू-ढम्, सर्वलोक पिता-महम,
महापाप हरम देवं, तं सूर्य प्रण-माम्यहम ||३||

त्रैगुन्यश्च महाशुरम ब्रम्हा-विष्णु महेश्वरं,
महापाप हरम देवं, तं सूर्य प्रण-माम्यहम ||४||

ब्रुम्हिम्तम तेजः पुन्जम्च, वायु-राकाश्-मेव च,
प्रभुत्वं सर्वलोका-नाम, तं सूर्य प्रण-माम्यहम ||५||

बन्धुक-पुष्प-संकानशम, हार-कुंडल-भुशितम,
एक-चक्र-धरम देवं, तं सूर्य प्रण-माम्यहम ||६||

तं सूर्य लोक-कर्तारम, महा तेजः प्रदिप्नम्,
महापाप हरम देवं, तं सूर्य प्रण-माम्यहम ||७||

तं सूर्य जगतां नाथं, ज्ञान-प्रकाश-मोक्ष-दम्,
महापाप हरम देवं, तं सूर्य प्रण-माम्यहम ||८||

सूर्य-अष्ठकम् पाठे नित्यम, ग्रह-पीड़ा प्रनाशानाम्,
अपुत्रो लभते पुत्रं, दारिद्रो धन्वान भवेत् ||९||

अमिषम मधुपनाम च, यः करोति रवेद्रिने,
ना व्याधि शोक दारिद्रयं, सूर्य लोकं च गच्छती ||१०||

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Lord Sun is the only deity who is still visible to common man, he provides us ultra voilet radiations that are necessary for survival of man kind. People have seen Sun only from scientific point of view like Light of Sun, Heat of Sun, Radiations of Sun, but as per our Ancient vedas and puranas Sun has Tantric Point of view. This Tantra is called or known as Surya Vigyan. Through Surya Vigyan any person can achieve desired results as per his/her needs. A Person can get success in life, achieve his/her aim, get anything he/she wants just by praying Lord Surya.

Lord Surya is king of all 9 Grahas, you can reduce malefic effect of all navgrahas by praying lord surya daily. Lord Surya is father of Lord Shani Dev and Lord Yamraaj. Offering of Water or Jal to Lord Surya by chanting his 12 Holy names should be done on daily basis, this pleases Lord Surya. I will give you more Prayogs related to Lord Surya in this blog very soon.

Surya Ashthakam is dedicated to Lord Sun. It is a very beneficial Ashtak that gives multiple benefits when chanted daily. It reduces the malefic effects of all Navgrahas as Lord Surya is the King of all planets. I am presenting Surya Ashtakam in this post. Make it a part of your Daily Pujan.

If you are suffering from Job Problems or any other Problems in Life, Surya Ashthakam can help you in each and every stage of your life. The effect of Surya Ashthakam can be increased if you use a Siddha Surya Yantra.

I am providing this Ashtakam in English for better pronounciation. The words that contain ( - ) are joint words. Look carefully for Single ( a ) and double ( aa ) that extends the sound.

Surya Ashtakam


Adidev Namas-tub-bhyam, Prasid mam Bhaska-ra,
Divaa-kar Namas-tub-bhyam, Prabhaa-kar Namo-stute || 1 ||

Saptaa-shva Ratha-maaru-dham Prachan-dam Kashya-paat-majam,
Shwet Padmaa-dharam Devam, Tam Surya Pran-maamya-ham || 2 ||

Lohitam Ratha-maaru-dham, Sarvlok Pitaa-maham,
Maha-paap-haram Devam, Tam Surya Pran-maamya-ham || 3 ||

Traigun-yascha Maaha-Shuram Bramhaa-Vishnu Mahesh-waram,
Maha-paap-haram Devam, Tam Surya Pran-maamya-ham || 4 ||

Brum-him-tam Tejah-Punjam-cha, Vayu-raakaash-meva cha,
Prabhutvam Sarvlokaa-naam, Tam Surya Pran-maamya-ham || 5 ||

Bandhuk-Pushpa-Sankaan-sham Haar-kundal-bhushitam,
Ek-chakra-dharam Devam, Tam Surya Pran-maamya-ham || 6 ||

Tam Surya Loka-kar-taaram, Maha Tejah Pradipnam,
Maha-paap-haram Devam, Tam Surya Pran-maamya-ham || 7 ||

Tam Surya Jagtaam Naatham, Dnyaan-prakaash-moksha-dam,
Maha-paap-haram Devam, Tam Surya Pran-maamya-ham || 8 ||

Surya-ashthakam Pathe-nityam, Graha-peeda Pra-naashanam,
Aputro Labhate Putram, Daaridro Dhanvaan Bhavet || 9 ||

Amisham Madhupaanam Cha, Yah Karoti Ravedirne,
Na Vyaadhi Shok Daari-dra-yam, Surya Lokam Cha Gaccha-ti || 10 ||

|| ॐ नमः शिवाय ||
|| जय माता दी ||


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